नमस्कार दोस्तों,मेडिकल बेसिक नॉलेज | हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी स्वास्थ्य जानकारी | Medical Basic Knowledge in Hindi | इस ब्लॉग में आपका स्वागत है |

शुरुआती जानकारी
आज के समय में Medical Basic Knowledge केवल डॉक्टरों और हेल्थ प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं रह गया है। एक आम इंसान के लिए भी यह ज़रूरी हो गया है कि वह अपने शरीर की सामान्य क्रियाओं और स्वास्थ्य संकेतों को समझे। इससे न सिर्फ हम अपनी सेहत का ध्यान बेहतर तरीके से रख सकते हैं, बल्कि ज़रूरत के समय सही निर्णय भी ले सकते हैं।
इस blog में हम कुछ बहुत ही ज़रूरी और बेसिक मेडिकल टर्म्स जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, रेस्पिरेशन रेट, ब्लड शुगर, बॉडी टेम्परेचर और ऑक्सीजन सैचुरेशन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। ये सभी जानकारियाँ वीडियो “Medical Basic Knowledge in Hindi” से ली गई हैं, जिसे आमिर हसीन ने बेहद सरल भाषा में समझाया है।
1. ब्लड प्रेशर (Blood Pressure)
ब्लड प्रेशर क्या होता है?
जब दिल (heart) पंप करता है तो वह खून को धमनियों (arteries) में भेजता है। इस प्रक्रिया में खून जो दबाव (pressure) धमनियों की दीवारों पर डालता है, उसे ही ब्लड प्रेशर कहा जाता है।
ब्लड प्रेशर के प्रकार
जब हमारा दिल धड़कता है और शरीर में खून को पंप करता है, तब जो ब्लड प्रेशर बनता है उसे सिस्टोलिक कहा जाता है। इसे आमतौर पर ऊपर वाला ब्लड प्रेशर भी कहा जाता है। वहीं, जब दिल थोड़ा रुककर आराम करता है और खून को नहीं पंप कर रहा होता, तब जो दबाव होता है उसे डायस्टोलिक कहा जाता है, जिसे नीचे वाला ब्लड प्रेशर कहते हैं। दोनों ही ब्लड प्रेशर को मापना जरूरी होता है ताकि हमें अपने दिल की सेहत के बारे में सही जानकारी मिल सके।
नॉर्मल ब्लड प्रेशर
| उम्र वर्ग | नॉर्मल ब्लड प्रेशर (mmHg) |
|---|---|
| वयस्क (Adult) | 120/80 |
| नवजात शिशु | 90/55 |
| वृद्ध व्यक्ति | 150/90 |
हाई ब्लड प्रेशर (High BP) या हाइपरटेंशन
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140/90 मिमीएचजी या उससे ज्यादा हो जाता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। जब ब्लड प्रेशर 150/90 मिमीएचजी से ऊपर पहुंच जाता है, तो यह और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है, ताकि सही इलाज समय पर मिल सके और कोई बड़ी परेशानी न हो।
लो ब्लड प्रेशर (Low BP) या हाइपोटेंशन
जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90/60 मिमीएचजी से कम हो जाता है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है, चक्कर आ सकते हैं और थकान भी लग सकती है। यह भी एक गंभीर स्थिति हो सकती है, इसलिए समय रहते ध्यान देना जरूरी होता है।
2. हार्ट रेट / पल्स रेट (Heart Rate / Pulse Rate)
हार्ट रेट क्या है?
जब दिल एक बार धड़कता है, तो एक पल्स (pulse) उत्पन्न होता है। इसी दर को हार्ट रेट या पल्स रेट कहते हैं।
नॉर्मल हार्ट रेट
मनुष्य के दिल की सामान्य धड़कन 60 से 90 बीट्स प्रति मिनट (BPM) मानी जाती है। यानी एक मिनट में दिल लगभग 60 से 90 बार धड़कता है। आमतौर पर, 72 बीट्स प्रति मिनट को औसत या सामान्य हार्ट रेट माना जाता है। इसका मतलब है कि जब हम आराम की स्थिति में होते हैं, तो हमारा दिल लगभग इतनी बार धड़कता है, जो शरीर के लिए सामान्य और स्वस्थ स्थिति मानी जाती है।
हाई पल्स रेट (Tachycardia)
जब दिल की धड़कन 90 से 120 बीट्स प्रति मिनट के बीच हो जाती है, तो इस स्थिति को टैकीकार्डिया (Tachycardia) कहा जाता है। इसका मतलब है कि दिल सामान्य से तेज़ धड़क रहा है। ऐसा कई बार तनाव, डर, दौड़ने या किसी शारीरिक मेहनत की वजह से हो सकता है। लेकिन अगर बिना किसी कारण के दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगे, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
लो पल्स रेट (Bradycardia)
जब दिल की धड़कन 40 से 60 बीट्स प्रति मिनट के बीच होती है, तो इसे ब्रैडीकार्डिया (Bradycardia) कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब दिल धीरे-धीरे धड़कता है, यानी सामान्य से कम रफ्तार से काम करता है। कुछ लोगों में यह सामान्य हो सकता है, खासकर जो नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, लेकिन कभी-कभी यह स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
3. रेस्पिरेशन रेट (Respiration Rate)
रेस्पिरेशन रेट क्या है?
यह दर दर्शाती है कि एक व्यक्ति एक मिनट में कितनी बार साँस लेता है।
नॉर्मल रेस्पिरेशन रेट
| उम्र वर्ग | नॉर्मल रेस्पिरेशन रेट (Breaths/Min) |
|---|---|
| वयस्क | 12 – 18 साँस प्रति मिनट |
| नवजात शिशु | 30 – 40 साँस प्रति मिनट |
| शिशु (Infant) | 30 – 60 साँस प्रति मिनट |
4. ऑक्सीजन सैचुरेशन (Oxygen Saturation)
SPO2 क्या है?
SPO2, जिसे ऑक्सीजन सैचुरेशन कहा जाता है, यह बताता है कि हमारे खून में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन मौजूद है। इसे मापने के लिए एक छोटा उपकरण इस्तेमाल किया जाता है जिसे पल्स ऑक्सीमीटर कहते हैं। यह उपकरण उंगली पर लगाया जाता है और कुछ ही सेकंड में हमें ऑक्सीजन का स्तर दिखा देता है।
नॉर्मल ऑक्सीजन सैचुरेशन
खून में ऑक्सीजन का स्तर अगर 95% से 100% के बीच हो, तो इसे सामान्य माना जाता है। इस रेंज में ऑक्सीजन की मात्रा शरीर के लिए पर्याप्त होती है और यह अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है।
कम ऑक्सीजन सैचुरेशन
| श्रेणी | SPO2 प्रतिशत |
|---|---|
| हल्का कम | 92% – 94% |
| बहुत कम | 80% – 89% |
| खतरनाक स्तर | 80% से कम |
नोट: अगर SPO2 90% से नीचे हो, तो तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट देना चाहिए।
आदिक जानकारी के लिए इस विडियो को जरुर देखे।
5. ब्लड शुगर (Blood Sugar)
ब्लड शुगर क्या है?
यह हमारे खून में मौजूद ग्लूकोज (शुगर) का स्तर होता है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है।
फास्टिंग ब्लड शुगर का मतलब है खाली पेट लिया गया ब्लड शुगर टेस्ट, जिसे आमतौर पर सुबह नाश्ता करने से पहले किया जाता है। पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर का मतलब है खाना खाने के बाद लिया गया ब्लड शुगर टेस्ट, जिससे पता चलता है कि भोजन के बाद शरीर में शुगर का स्तर कितना बढ़ा है।
नॉर्मल रेंज
| टेस्ट स्थिति | नॉर्मल रेंज (mg/dL) |
|---|---|
| फास्टिंग | 80 – 100 |
| खाना खाने के बाद | 170 – 200 |
प्री-डायबिटिक स्थिति
फास्टिंग: 101 – 125 mg/dL
डायबिटिक स्थिति
अगर फास्टिंग ब्लड शुगर का स्तर 126 mg/dL या उससे अधिक हो, तो इसे डायबिटीज की स्थिति माना जाता है। इसका मतलब है कि खाली पेट खून में शुगर की मात्रा सामान्य से ज़्यादा है, जो मधुमेह का संकेत हो सकता है।
6. बॉडी टेम्परेचर (Body Temperature)
शरीर का तापमान कैसे मापा जाता है?
हम अपने शरीर का तापमान जानने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल करते हैं। यह एक ऐसा यंत्र है, जो हमें बताता है कि हमारे शरीर में गर्मी सामान्य है या बुखार है। थर्मामीटर से तापमान मापकर डॉक्टर इलाज में आसानी से सही फैसला ले पाते हैं।
नॉर्मल बॉडी टेम्परेचर
हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 97.5 डिग्री फ़ारेनहाइट से 98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच होता है। अगर तापमान इससे ज़्यादा हो जाए, तो यह बुखार होने का संकेत हो सकता है, और अगर इससे कम हो जाए, तो यह शरीर में ठंडक या अन्य समस्या की ओर इशारा करता है।
बुखार के स्तर
| तापमान (°F) | स्थिति |
|---|---|
| 99°F | हल्का बुखार (Low fever) |
| 100°F – 101°F | मध्यम बुखार |
| 102°F या उससे अधिक | तेज बुखार (High fever) |
आखिर में क्या समझ ना जरूरी हे
आज की इस जानकारी से यह स्पष्ट है कि कुछ बुनियादी मेडिकल जानकारियाँ हर इंसान के लिए कितनी ज़रूरी हैं। चाहे ब्लड प्रेशर हो या हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल हो या ब्लड शुगर – इन सभी संकेतों की सामान्य सीमा और उनके असामान्य होने के प्रभावों को जानना हमारे जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बना सकता है।
अगर हम इन बेसिक हेल्थ पैरामीटर्स की जानकारी रखें, तो ना सिर्फ हम समय रहते रोगों को पहचान सकते हैं, बल्कि अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकते हैं।

हेल्थ टिप्स (Medical Basic Knowledge Tips in Short)
हर 6 महीने में एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप ज़रूर कराएं।
घर में एक डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर, थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर रखें।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है।
ब्लड शुगर की जांच फास्टिंग और खाने के बाद समय-समय पर कराएं।
सांस की दिक्कत हो तो ऑक्सीजन सैचुरेशन ज़रूर चेक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Medical Basic Knowledge)
Q1: क्या हाई ब्लड प्रेशर खतरनाक होता है?
हाँ, यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
Q2: क्या ऑक्सीजन लेवल 92% होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
हाँ, 92% से कम ऑक्सीजन सैचुरेशन खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर से संपर्क करें।
Q3: क्या खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट करना ज़रूरी है?
जी हाँ, इससे डायबिटीज का सटीक पता चलता है।
Q4: हार्ट रेट अगर 100 से ऊपर चला जाए तो क्या करें?
आराम करें और अगर लगातार हाई रहता है तो डॉक्टर से मिलें।
स्वस्थ रहें, सजग रहें!
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