Iron Deficiency Symptoms,Causes & Treatment In Hindi | आयरन की कमी (अनीमिया) के कारण, 6 लक्षण और इलाज |

Iron Deficiency Symptoms,Causes & Treatment In Hindi | आयरन की कमी (अनीमिया) के कारण, 6 लक्षण और इलाज |

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नमस्कार दोस्तों, Iron Deficiency Anemia Symptoms, Causes & Treatment | आयरन की कमी (अनीमिया) के कारण, लक्षण और इलाज| इस ब्लॉग में आपका स्वागत है |


आयरन की कमी (अनीमिया) क्या है और यह क्यों होती है?

आज के समय में आयरन की कमी यानी “Iron Deficiency Anemia” एक बहुत ही आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, खासकर भारत जैसे देशों में जहाँ महिलाओं और बच्चों में यह स्थिति अधिक देखी जाती है। यह समस्या तब होती है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन (लोहा) नहीं होता, जिससे शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।

हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो रक्त में ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाने में मदद करता है। अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो शरीर थका-थका, सुस्त और कमजोर महसूस करता है।

इस Blog में हम जानेंगे

आयरन डिफिशिएंसी अनीमिया के कारण (Causes)

इसके लक्षण (Symptoms)

जांच (Diagnosis)

और सबसे महत्वपूर्ण – इसका इलाज (Treatment)


आयरन की कमी (Iron Deficiency) क्यों होती है?

1. खराब आहार (Poor Diet)

यदि आप ऐसे भोजन नहीं ले रहे जिसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन हो, तो शरीर में धीरे-धीरे इसकी कमी होने लगती है।

कमज़ोर डाइट में शामिल चीज़ें

अगर कोई व्यक्ति रोज़ाना बहुत ज्यादा जंक फूड खाता है, तो उसके शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे खाने में न तो प्रोटीन होता है और न ही आयरन जैसे ज़रूरी मिनरल्स। इसके अलावा, जब हम अपने भोजन में सब्जियाँ और फल नहीं शामिल करते, तो शरीर को विटामिन और आयरन की कमी होने लगती है। इस तरह की आदतें धीरे-धीरे हमारे शरीर में आयरन की कमी यानी अनीमिया को बढ़ावा देती हैं। इसलिए संतुलित और पोषणयुक्त आहार लेना बहुत ज़रूरी है।

2. पेट में कीड़े (Worm Infestation)

अक्सर देखा गया है कि बच्चों और गाँवों में रहने वाले लोगों के पेट में कीड़े हो जाते हैं। ये कीड़े शरीर के अंदर मौजूद ज़रूरी पोषक तत्वों, खासकर आयरन को खा जाते हैं। जब शरीर को पूरा आयरन नहीं मिल पाता, तो धीरे-धीरे खून की कमी यानी अनीमिया हो जाता है। यही वजह है कि पेट के कीड़ों को समय पर दवा देकर ठीक करना बहुत ज़रूरी होता है।

3. अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive Blood Loss)

अगर किसी महिला को हर महीने मासिक धर्म के समय बहुत ज़्यादा खून आता है, तो इससे उसके शरीर में धीरे-धीरे खून की कमी हो सकती है। इसी तरह, अगर किसी कारण से बार-बार शरीर से खून निकलता है — जैसे बवासीर की समस्या हो, बार-बार नाक से खून बहता हो या कोई चोट लगने पर खून रुक-रुक कर निकलता हो — तो ये सभी स्थितियाँ मिलकर शरीर में आयरन की कमी पैदा कर सकती हैं। जब शरीर में ज़रूरी मात्रा में खून नहीं रहता, तो अनीमिया हो जाता है। इसलिए ऐसी स्थितियों में समय पर इलाज कराना बहुत ज़रूरी है।

4. कुछ बीमारियाँ और संक्रमण

अगर किसी को खांसी में खून आता है, जैसे कि टीबी जैसी बीमारी में होता है, तो यह शरीर से खून की धीरे-धीरे कमी कर सकता है। इसी तरह पेट से जुड़ी बीमारियाँ, जैसे अल्सर, में भी अंदरूनी रूप से खून बह सकता है जो दिखता नहीं लेकिन शरीर को नुकसान पहुँचाता है। बार-बार डायरिया होना या आंतों में सूजन के कारण खून बहना (जिसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग कहा जाता है) भी शरीर में आयरन की मात्रा को कम कर देता है। इन सभी कारणों से आयरन की कमी होकर अनीमिया हो सकता है, इसलिए ऐसी बीमारियों का समय पर इलाज करवाना बहुत ज़रूरी होता है।


आयरन डिफिशिएंसी अनीमिया के लक्षण (Symptoms)

आयरन की कमी शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती है और इसके लक्षण भी धीरे-धीरे सामने आते हैं

1. थकावट और कमजोरी

जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो व्यक्ति को हर समय थकावट महसूस होती है। बिना कोई मेहनत किए भी शरीर भारी लगता है और सुस्ती छाई रहती है। किसी भी काम में मन नहीं लगता और ऊर्जा की कमी सी महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे दिनभर लेटे रहने का मन हो। यह आयरन की कमी का एक आम और शुरुआती लक्षण हो सकता है।

2. सांस फूलना

जब शरीर में खून की कमी होती है, तो थोड़ा सा भी चलने-फिरने पर सांस फूलने लगती है। सीढ़ियाँ चढ़ने या कुछ दूर चलने पर दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है और ऐसा लगता है जैसे शरीर थक गया हो। यह इसलिए होता है क्योंकि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, और दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यह लक्षण आयरन की कमी के कारण अनीमिया होने पर आमतौर पर देखने को मिलता है।

3. अजीब आदतें (Pica)

जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो कुछ लोगों को अजीब चीज़ें खाने की इच्छा होने लगती है। जैसे – मिट्टी, बर्फ, ईंट या चॉक जैसी चीज़ें जो सामान्य तौर पर खाने योग्य नहीं होतीं। यह एक खास तरह की स्थिति होती है जिसे ‘पिका’ कहा जाता है और यह आयरन की कमी का एक आम लक्षण माना जाता है। ऐसी आदतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में पोषक तत्वों की गंभीर कमी का संकेत हो सकता है।

4. आंखों का रंग फीका पड़ना

जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो इसका असर आंखों पर भी दिखाई देता है। सामान्य रूप से आंखों के नीचे की त्वचा हल्की गुलाबी होती है, लेकिन आयरन की कमी होने पर यह रंग फीका पड़ने लगता है। आंखों का यह भाग सफेद या बहुत हल्का दिखाई देने लगता है, जो खून की कमी का साफ संकेत हो सकता है। यह एक आसान तरीका है जिससे हम घर पर ही अनीमिया का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

5. जीभ में जलन और नाखून टूटना

आयरन की कमी होने पर जीभ में अजीब-सा दर्द महसूस हो सकता है या वह बहुत चिकनी और सपाट लगने लगती है। जीभ का रंग भी हल्का पड़ सकता है और उसमें जलन महसूस हो सकती है। इसी तरह नाखूनों पर सीधी धारियां दिखने लगती हैं, वे कमज़ोर हो जाते हैं और ज़रा सी चोट या दबाव से टूटने लगते हैं। ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर में आयरन की कमी हो रही है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

6. हाथ-पैरों में सुन्नपन

अगर शरीर में लंबे समय तक आयरन की कमी बनी रहती है, तो इसका असर हमारी नसों पर भी पड़ने लगता है। इस वजह से कई बार हाथों और पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होने लगता है। ऐसा लगता है जैसे अंग सुन्न हो गए हों या उनमें चींटियाँ रेंग रही हों। यह संकेत दर्शाता है कि अब आयरन की कमी गंभीर रूप ले रही है और तुरंत इलाज की ज़रूरत है।

आदिक जानकारी के लिए इस विडियो को जरुर देखे।


जाँच कैसे की जाती है? (Diagnosis of Iron Deficiency)

इस बीमारी की सही पहचान बहुत ज़रूरी है।

1. Complete Blood Count (CBC)

CBC टेस्ट में कई मार्कर होते हैं जिनसे हमें आयरन डिफिशिएंसी के बारे में पता चलता है

जब डॉक्टर खून की जांच करते हैं, तो उसमें कुछ ज़रूरी चीज़ें देखी जाती हैं। सबसे पहले हीमोग्लोबिन (HB) देखा जाता है। अगर इसका स्तर कम होता है, तो इसका मतलब है कि व्यक्ति को अनीमिया है। इसके अलावा MCV नामक जांच से यह पता चलता है कि खून की लाल कोशिकाओं (RBC) का आकार कैसा है। आयरन की कमी होने पर ये कोशिकाएं छोटी हो जाती हैं, जिसे माइक्रोसाइटिक अनीमिया कहते हैं।

MCH और MCHC भी खून में रंग और हीमोग्लोबिन की मात्रा से जुड़ी होती हैं, और ये भी आयरन की कमी में कम हो जाती हैं। वहीं RDW अगर बढ़ा हुआ मिले, तो यह बताता है कि खून की कोशिकाओं के आकार में अंतर है, जो आयरन या विटामिन B12 की कमी का संकेत हो सकता है। ये सभी जांचें मिलकर हमें बताते हैं कि शरीर में आयरन की स्थिति कैसी है।

2. Serum Ferritin

फेरिटिन एक खास प्रकार की जाँच होती है जो यह बताती है कि शरीर में आयरन का भंडार कितना है। यानी हमारे शरीर में कितनी मात्रा में आयरन जमा है। अगर फेरिटिन का स्तर बहुत कम आ रहा है, तो इसका मतलब है कि शरीर में आयरन की बहुत ज्यादा कमी हो गई है। यह स्थिति गंभीर अनीमिया का संकेत हो सकती है और इसके लिए तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

3. Serum Iron, TIBC, Transferrin Saturation

यह जांचें हमें यह बताती हैं कि खून में आयरन की कितनी मात्रा मौजूद है और शरीर उस आयरन को कितनी अच्छी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। इसमें यह भी पता चलता है कि शरीर आयरन को कितनी मात्रा में बाँध सकता है और उसका उपयोग कर सकता है। ये सभी जांचें मिलकर यह समझने में मदद करती हैं कि शरीर में आयरन की कमी कितनी है और उसका कारण क्या हो सकता है।


आयरन की कमी का इलाज (Iron Deficiency Treatment)

1. डाइट में सुधार

सबसे पहले खानपान में बदलाव करना ज़रूरी है

आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ

आयरन की कमी को दूर करने के लिए हमें अपने खाने में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए जिनमें आयरन भरपूर मात्रा में हो। जैसे हरी पत्तेदार सब्जियाँ – पालक और मेथी शरीर को ताकत देती हैं और आयरन से भरपूर होती हैं। चुकंदर और अनार खून बढ़ाने वाले फल माने जाते हैं।

गुड़ एक प्राकृतिक मीठा है जो आयरन का अच्छा स्रोत है। सूखे मेवे जैसे किशमिश और खजूर भी खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं। अंकुरित अनाज जैसे मूंग और चना पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। वहीं, अंडे, मांस और मछली नॉन-वेज खाने वालों के लिए आयरन का बेहतरीन स्रोत हैं। इन सभी चीज़ों को नियमित आहार में शामिल करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित बनी रहती है।

आयरन के साथ विटामिन C लेना चाहिए (जैसे – आंवला, नींबू), इससे आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।

2. आयरन सप्लीमेंट्स

अगर डाइट से पूरा नहीं हो रहा, तो डॉक्टर आयरन की गोलियां या सिरप देते हैं।

अगर शरीर में आयरन की कमी ज़्यादा होती है, तो डॉक्टर आयरन की गोलियाँ या सिरप लेने की सलाह देते हैं। ये मुंह के ज़रिए लिए जाते हैं, जैसे कि फेरस सल्फेट की गोली या सिरप। लेकिन अगर मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो या गोलियों और सिरप से कोई खास फायदा न हो रहा हो, तो ऐसे में डॉक्टर सीधे नसों के ज़रिए आयरन देने की सलाह देते हैं, जिसे IV आयरन थेरेपी कहा जाता है। यह तरीका जल्दी असर करता है और शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करता है।

3. पेट के कीड़ों का इलाज

अगर डॉक्टर की जांच में पता चलता है कि पेट में कीड़े हैं, तो उन्हें खत्म करने के लिए विशेष दवाइयाँ दी जाती हैं, जिन्हें डीवॉर्मिंग दवाएं कहा जाता है। ये दवाइयाँ शरीर के अंदर मौजूद कीड़ों को मार देती हैं और उनके कारण होने वाली आयरन की कमी को रोकने में मदद करती हैं। पेट के कीड़ों का समय पर इलाज करना बहुत ज़रूरी होता है ताकि शरीर में पोषक तत्वों की सही मात्रा बनी रहे और अनीमिया जैसी समस्याएँ न हों।

4. रोग के मूल कारण का इलाज

अगर किसी व्यक्ति को ऐसी कोई बीमारी है जिससे बार-बार खून बह रहा है, जैसे कि पेट की बीमारी या बवासीर, तो उस बीमारी का सही इलाज करना बहुत जरूरी होता है। इसी तरह, अगर शरीर खाने से लिए गए आयरन को ठीक से नहीं सोख पा रहा है, तो उसका भी कारण जानकर इलाज करना ज़रूरी है। जब तक इन समस्याओं को ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक आयरन की कमी बार-बार होती रहेगी और अनीमिया पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाएगा।

Iron Deficiency Symptoms,Causes & Treatment In Hindi | आयरन की कमी (अनीमिया) के कारण, 6 लक्षण और इलाज |

बच्चों और महिलाओं में आयरन की कमी पर खास ध्यान देना जरूरी

बच्चों में

बच्चों में आयरन की कमी से बचाव के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले, उन्हें समय-समय पर पेट के कीड़ों की दवा देना चाहिए, जिसे नियमित डीवॉर्मिंग कहा जाता है। इसके अलावा, उनके भोजन में आयरन से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए, जैसे हरी सब्जियाँ, फल और सूखे मेवे। साथ ही, माता-पिता को भी इस बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि बच्चों की सही देखभाल कैसे करें और आयरन की कमी से कैसे बचाया जा सकता है। जागरूकता ही बच्चों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

महिलाओं में

अगर किसी महिला को मासिक धर्म के दौरान बहुत ज़्यादा खून आता है, तो उसे इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। महिलाओं को अपने रोज़मर्रा के खाने में आयरन से भरपूर चीज़ें ज़रूर शामिल करनी चाहिए, जैसे – हरी सब्जियाँ, अनार, चुकंदर और सूखे मेवे। साथ ही, गर्भावस्था के दौरान तो आयरन की जरूरत और भी बढ़ जाती है, इसलिए उस समय नियमित रूप से आयरन की गोलियाँ लेना बहुत ज़रूरी होता है ताकि मां और बच्चे दोनों स्वस्थ रह सकें।


आयरन डिफिशिएंसी की पुनरावृत्ति कैसे रोकें?

आयरन की कमी से बचने के लिए हर 6 महीने में एक बार CBC और फेरिटिन की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही, संतुलित आहार लेना भी बेहद जरूरी है, जिसमें आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल हों। अगर किसी को बार-बार पेट के कीड़े हो रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। आयरन की दवाइयाँ बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। खून की कमी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, ताकि जल्दी से इलाज शुरू किया जा सके।


आयरन की कमी से बचाव और इलाज के लिए जरूरी बातें

आयरन डिफिशिएंसी ( Iron Deficiency) अनीमिया एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो शरीर की पूरी कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। समय रहते इसकी पहचान, सटीक जांच और उपचार ज़रूरी है।

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